केंद्र द्वारा “भारत में आत्महत्या 2021 (Suicides in India 2021)” की रिपोर्ट जारी कर दी गई है। वॉयस फॉर मेन इंडिया आपके लिए जेंडर के आधार पर एक संक्षिप्त विश्लेषण लाई है। कोई भी जीवन दूसरे की तुलना में अधिक या कम महत्वपूर्ण नहीं है। हालांकि, नीचे दिया गया डेटा लगातार व्यक्तिगत (वैवाहिक) कानूनों को जेंडर न्यूट्रल बनाने की आवश्यकता पर जोर देता है और शायद मृत अपमानजनक विवाह/रिश्ते से बाहर निकलना भी आसान बनाता है।
आत्महत्या की कुल संख्या
भारत में 2021 में कुल 164,033 आत्महत्याएं दर्ज की गईं, जबकि वर्ष 2020 में 153,052 रिपोर्ट की गई थी। यह प्रति मिलियन जनसंख्या पर 120 मौतों में तब्दील हो जाती है। इस साल पूरे भारत में आत्महत्या से होने वाली मौतों की दर अब तक के उच्चतम स्तर तक पहुंच गई है। डेटा 2020 से 7.2% की वृद्धि दर्शाता है, जहां कई विशेषज्ञों ने इसे COVID-19 महामारी के दौरान आने वाली चुनौतियों से जोड़ा है। 2019 में यह आंकड़ा करीब 139,000 था।
इन 5 राज्यों में दर्ज हुई भारत की 50% आत्महत्याएं
सबसे अधिक आत्महत्याएं महाराष्ट्र (22,207) में दर्ज की गईं। इसके बाद तमिलनाडु में 18,925 आत्महत्याएं हुईं। मध्य प्रदेश में 14,965 लोगों ने मौत को लगे लगाया। पश्चिम बंगाल में (13,500) आत्महत्याएं हुईं। कर्नाटक में (13,056) आत्महत्याएं दर्ज की गई। इन 5 राज्यों में देश में दर्ज की गई कुल आत्महत्याओं का 50.4% हिस्सा है। शेष 49.6% आत्महत्याएं शेष 23 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज की गईं।
उत्तर प्रदेश, सबसे अधिक आबादी वाला राज्य (देश की आबादी का 16.9% हिस्सा) ने आत्महत्या से होने वाली मौतों का तुलनात्मक रूप से कम प्रतिशत हिस्सा बताया है, जो देश में दर्ज की गई कुल आत्महत्याओं का केवल 3.6% है।
केंद्र शासित प्रदेश
दिल्ली (जो सबसे अधिक आबादी वाला केंद्र शासित प्रदेश है) ने केंद्रशासित प्रदेशों में सबसे अधिक आत्महत्या (2,840) दर्ज की है। इसके बाद पुडुचेरी (504) का स्थान है। 2021 के दौरान देश के 53 बड़े शहरों में कुल 25,891 आत्महत्याओं की सूचना मिली थी।
जेंडर के अनुसार आत्महत्याएं
2021 में भारत में दर्ज कुल 164,033 आत्महत्याओं में से इस साल आत्महत्या पीड़ितों का कुल पुरुष: महिला अनुपात 72.5: 27.4 था, जो कि वर्ष 2020 (70.9: 29.1) की तुलना में अधिक है।
पुरुष: 1,18,979
महिला: 45,026
ट्रांसजेंडर: 28
आत्महत्या: सोशल स्टेटस
आंकड़ों से पता चलता है कि आत्महत्या करने वालों में से 66.9% (1,64,033 में से 1,09,749) विवाहित थे, जबकि 24.0% अविवाहित (39,421) थे। 2021 के दौरान कुल आत्महत्या पीड़ितों में विधवा/विधवा, तलाकशुदा और अलग-अलग लोगों की संख्या क्रमश: 1.5% (2,485 पीड़ित), 0.5% (788 पीड़ित) और 0.5% (871 पीड़ित) रही है।
अविवाहित पुरुष Vs अविवाहित महिला
अविवाहित पुरुष: 27,305
अविवाहित महिला: 12,096
विवाहित पुरुष Vs विवाहित महिला
विवाहित पुरुष: 81,063
विवाहित महिलाएं: 28,680
तलाकशुदा पुरुष Vs तलाकशुदा महिलाएं
तलाकशुदा पुरुष: 494
तलाकशुदा महिला: 294
अलग पुरुष Vs अलग महिला
अलग पुरुष: 626
अलग महिला: 243
विधुर बनाम विधवा
विधुर: 1470
विधवा: 1015
सामूहिक पारिवारिक आत्महत्याएं
वर्ष 2021 के दौरान सामूहिक/पारिवारिक आत्महत्या के कुल 131 मामले दर्ज किए गए। इन आत्महत्याओं में, 197 विवाहित व्यक्तियों और 143 अविवाहित व्यक्तियों सहित कुल 340 व्यक्तियों ने अपनी जान गंवाई।
तमिलनाडु (33 मामले) में सामूहिक/पारिवारिक आत्महत्या के अधिकतम मामले दर्ज किए गए। उसके बाद राजस्थान (25 मामले), आंध्र प्रदेश (22 मामले), केरल (12 मामले) और कर्नाटक (10 मामले) का स्थान रहा। 2021 के दौरान तमिलनाडु में कुल 80 व्यक्ति, राजस्थान में 67 व्यक्ति, आंध्र प्रदेश में 56 व्यक्ति, कर्नाटक में 31 व्यक्ति और केरल में 26 व्यक्ति मारे गए।
53 शहरों में से 11 शहरों में सामूहिक/पारिवारिक आत्महत्याओं की सूचना मिली थी। इन 11 शहरों में सामूहिक/पारिवारिक आत्महत्याओं के 29 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 2021 के दौरान 75 लोगों ने आत्महत्या की है। इनमें से 44 व्यक्ति विवाहित थे और 31 अविवाहित व्यक्ति थे।
आत्महत्याओं के प्रमुख कारण
‘पारिवारिक समस्याएं’ और ‘बीमारी’ आत्महत्या के प्रमुख कारण बने हुए हैं, जो 2021 के दौरान कुल संख्या का क्रमशः 33.2% और 18.6% था। ‘ड्रग एब्यूज/अल्कोहल की लत’ (6.4%), ‘विवाह संबंधी मुद्दे’ (4.8%), ‘लव अफेयर्स’ (4.6%), ‘दिवालियापन या लोन’ (3.9%), ‘बेरोजगारी’ (2.2%) ,’ परीक्षा में असफलता’ (1.0%), ‘पेशेवर/कैरियर समस्या’ (1.6%) और ‘गरीबी’ (1.1%) आत्महत्या के अन्य कारण थे।
आत्महत्या- पेशे के अनुसार
कुल 1,18,979 पुरुष आत्महत्याओं में से अधिकतम आत्महत्या दैनिक वेतन भोगियों (37,751) द्वारा की गई, इसके बाद स्व-नियोजित व्यक्तियों (18,803) और बेरोजगार व्यक्तियों (11,724) द्वारा की गई। देश में 2021 के दौरान कुल 45,026 महिलाओं ने आत्महत्या की। आत्महत्या करने वाली महिलाओं में सबसे अधिक (23,178) गृहिणियों की थी, उसके बाद छात्रों (5,693) और दैनिक वेतन भोगी (4,246) की थी।
इस दौरान कुल 28 ट्रांसजेंडर ने आत्महत्या की है। 28 ट्रांसजेंडरों में से 9 ‘बेरोजगार व्यक्ति’ और 7 ‘दैनिक वेतन भोगी’ थे, 2 ‘स्व-नियोजित व्यक्ति’ थे और 1 प्रत्येक ‘गृहिणी’ और ‘पेशेवर/वेतनभोगी व्यक्ति’ थे। जबकि 8 ‘अन्य’ कैटेगरी में आते हैं।
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