मुंबई के एक मजिस्ट्रेट अदालत (The Magistrate Court in Mumbai) ने हाल ही में एक महिला सॉफ्टवेयर इंजीनियर का पीछा करने के कालबादेवी निवासी आरोपी 32 वर्षीय कारोबारी को यह कहते हुए बरी कर दिया कि सुबह के व्यस्त ऑफिस टाइम के दौरान फुटपाथ पर चल रहे किसी व्यक्ति का पीछा करना बेहद असंभव है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2019 का है। महिला ने आरोप लगाया था कि जब वह सुबह फुटपाथ पर चल रही थी तो आरोपी कारोबारी उसके पास आया और “गुड मॉर्निंग” कहा। जबकि बचाव पक्ष का दावा था कि वह अपने सेलफोन पर ब्लूटूथ डिवाइस के माध्यम से बात कर था, उस दौरान उसने दूसरे शख्स से गुड मॉर्निंग कहा। महिला ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया था कि अप्रैल से मई 2019 के बीच जब वह सुबह अपने घर से ऑफिस जाती थी तो आरोपी उसका पीछा करता था।
उसने अपने आरोप में कहा था कि एक दिन आरोपी उसके पास आया और उसके कानों में “गुड मॉर्निंग” कहा। इस घटना के दौरान जैसे ही उसने पास में खड़े एक सहकर्मी को देखा और उसे मामले की जानकारी दी तो आरोपी मौके से चला गया। फिर दो दिन बाद, जब उसका भाई उसे अपनी मोटरसाइकिल पर छोड़ने गया था तो उसने पास के एक भोजनालय के बाहर फिर से आरोपी को देखा। उसने दावा किया कि जब उसके भाई ने आरोपी से विरोध जताया तो दोनों के बीच बहस हो गई और कई लोग इकट्ठा हो गए और आरोपी के साथ मारपीट की।
कोर्ट का आदेश
कोर्ट ने कहा कि आजकल इस तरह की गलतफहमी संभव है, क्योंकि ब्लूटूथ डिवाइस पर बात करने वाले कई लोगों को देखकर ये गलतफहमी हो जाती है कि वे सड़क पर चल रहे राहगीरों से बात कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की एक खबर के मुताबिक, सॉफ्टवेयर इंजीनियर का एक महीने तक पीछा करने के आरोपी व्यवसायी को बरी करते हुए मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट यशश्री मारुलकर (Yashshree Marulkar) ने कहा कि अगर आरोपी का पीछा करने करने का इरादा होता तो वह कम से कम कभी-कभी ऑफिस से घर लौटते समय शाम के समय भी उसका पीछा करता। जज ने कहा कि आरोपी का यह बचाव कि महिला को गलतफहमी हुई होगी, भरोसा करने लायक है। मजिस्ट्रेट ने कहा कि सुबह के इतने व्यस्त टाइम में फुटपाथ पर किसी का पीछा करना असंभव है।
पिछले हफ्ते की शुरुआत में पारित आदेश में मजिस्ट्रेट ने कहा कि आजकल लोग सेलफोन का इस्तेमाल करते समय ब्लूटूथ डिवाइस का यूज करते हैं। तो सामने वाला भी यह नहीं समझ पाता कि वह आदमी अपने सेलफोन पर किसी दूसरी शख्स से बात कर रहा है या उसके बारे में कमेंट कर रहा है, तो ऐसी गलतफहमियां निश्चित रूप से संभव हैं। अदालत ने कहा कि आरोपी का ऑफिस और महिला का घर एक ही इलाके में है और इसलिए यह संभव हो सकता है कि वे एक ही समय एक ही सड़क पर चल रहे हों।
मजिस्ट्रेट ने आगे कहा कि यह बहुत स्वाभाविक और स्पष्ट था कि दक्षिण मुंबई में कालबादेवी जैसे भीड़भाड़ वाले और व्यावसायिक क्षेत्र में बहुत से लोग नियमित रूप से एक ही फुटपाथ पर चलते हैं और एक ही समय में दुकानों और ऑफिस जैसे अपने-अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। मजिस्ट्रेट ने निष्कर्ष निकाला कि अभियुक्त का बचाव कि उसे यह गलतफहमी हो सकती है कि वह उसका पीछा कर रहा था और उसे ‘गुड मॉर्निंग’ कहना विश्वसनीय है।
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