चंडीगढ़ (Chandigarh) की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट (Fast Track Court) की स्पेशल जज स्वाति सहगल ने अभियोजन पक्ष द्वारा आरोपों को साबित करने में विफल रहने के बाद POCSO मामले में गिरफ्तार एक 19 वर्षीय युवक को बरी कर दिया। यह मामला इसी साल जनवरी का है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने नाबालिग लड़की की तहरीर पर आरोपी के खिलाफ FIR दर्ज की थी। लड़की ने अपनी शिकायत में कहा था कि वह एक कार्यक्रम के दौरान आरोपी के संपर्क में आई थी। 27 फरवरी 2022 को आरोपी ने उसे एक घर में बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। उसने यह बात किसी को बताने पर उसकी छवि खराब करने की धमकी भी दी। जांच के दौरान आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। जांच पूरी करने के बाद पुलिस द्वारा कोर्ट में चालान पेश किया गया।
एक प्रथम दृष्टया मामले का पता चलने पर IPC की धारा 376 (3) के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 4 के तहत आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए गए थे, जिसके लिए उसने दोषी नहीं होने का अनुरोध किया और मुकदमे का दावा किया।
आरोपी के वकील एनके नंदा ने दलील दी थी कि उन्हें मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने कहा कि शिकायतकर्ता ने अदालत के समक्ष आरोपों से इनकार किया है। वकील ने कहा कि 70 दिनों की देरी के बाद मामला दर्ज किया गया, जो अपने आप में अभियुक्तों के झूठे आरोप को दर्शाता है। दूसरी तरफ सरकारी वकील ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष ने मामला साबित कर दिया है।
दोनों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने आरोपी को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने यह देखते हुए बरी किया कि अभियोजन पक्ष IPC की धारा 376 (3) और धारा 4 की धारा 4 के तहत दंडनीय किसी भी अपराध के आवश्यक घटक को घर लाने में बुरी तरह विफल रहा है। कोर्ट ने कहा कि POCSO एक्ट किसी भी संदेह की छाया से परे है।
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