सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में 158 साल पुराने एंटी एडल्ट्री कानून (Adultery Law) को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि यह असंवैधानिक है क्योंकि यह महिलाओं को ‘पति की संपत्ति’ के रूप में मानता है। 2018 से पहले यह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 497 के तहत दंडनीय अपराध था। इस जुर्म में पाच साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान भी था। सितंबर 2018 में तत्कालीन चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) दीपक मिश्रा ने इस कानून को असंवैधानिक करार देते हुए कहा था, “एडल्ट्री को अपराध की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता है और यह जुर्म होना भी नहीं चाहिए।”
ये फैसला सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने जोसेफ शाइनी की याचिका पर सुनाया था जिसमें एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर बनाने को अपराध मानने वाली IPC की धारा 497 को असंवैधानिक ठहराया गया था। इस बीच, एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिससे पता चलता है कि एडल्ट्री कानून के डिक्रिमिनलाइजेशन होने के बाद डेटिंग ऐप खुलेआम विवाहित महिलाओं को पतियों के खिलाफ बेवफाई के लिए उकसा रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, विवाह के छह साल बाद राजधानी दिल्ली की 36 वर्षीय फैशन डिजाइनर सोनाली जैन (बदला हुआ नाम) को अब पहले जैसा शादी का आनंद नहीं आ रहा है, जिसकी वह इच्छा रखती हैं। हालांकि, वह बूढ़े माता-पिता की वजह से अपने पति को तलाक नहीं दे सकती हैं। इसलिए, उन्होंने निजी तौर पर डेट करने का फैसला किया। सोनाली ने बताया कि Gleeden (एक ऐसा ऐप जो केवल विवाहित लोगों के लिए है) ने उन्हें एक ऐसे रिश्ते को टूटने से बचाने में मदद किया जो क्रोध, मतभेद और अनादर से भर चुका है।
यूजर्स का कहना है कि ग्लीडेन पर कोई भी अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में झूठ बोले बिना खुले तौर पर एक संतोषजनक रिश्ता पा सकता है। जैन को इस डेटिंग ऐप पर एक ऐसा साथी मिला जो शादीशुदा भी है और तलाक देने में असमर्थ है। इस ऐप पर जब वे आधिकारिक तौर पर जुड़ते हैं, तो उनका नया साथी सच्चा पति हो जाता है। जैन कहती हैं, “एक पति वह होता है जो आपकी आत्मा का साथी हो। आपको इसके लिए सामाजिक स्वीकृति या सरकारी कागजात की आवश्यकता नहीं है। अपने-अपने दिल से हम एक साथ हैं। दूसरे क्या सोचते हैं इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि कोई ऐ नहीं जानता कि हम बहुत खुश हैं।”
जैन का कहना है कि उनका ‘आधिकारिक’ पति इस नए साथी के बारे में जानता है। उसे मेरे नए रिस्ते से कोई आपत्ति नहीं है क्योंकि वह भी किसी अन्य महिला के साथ संबंध में है। उन्होंने उसे तलाशने की अनुमति दे दी है। सोनाली कहती हैं, “यदि आप एक दूसरे को सुखी नहीं रख सकते, तो कब तक दु:ख भोगोगे? हमने एक दूसरे के लिए सबसे अच्छा काम किया है और इसने वास्तव में हमें सार्वजनिक रूप से एक दूसरे के लिए अच्छा और दयालु बना दिया है।”
जैन जैसी कई महिलाएं खुले रिश्तों के लिए ऐसे डेटिंग ऐप का सहारा ले रही हैं। ग्लीडेन इंडिया के कंट्री मैनेजर सिबिल शिडेल ने कहा कि वह लोग आज ग्लीडेन जैसे ऐप का अधिक सहारा ले रहे हैं, जहां कपल के बीच तलाक का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि कई कपल अब इस बारे में खुली चर्चा करना कर रहे हैं। एक लंबे समय तक चलने वाले विवाह में एक कपल अब एक दूसरे से कनेक्ट नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत में भी इस तरह के खुले रिश्ते तेजी से स्वीकार्य हो रहे हैं। अगर सार्वजनिक क्षेत्र में नहीं तो निश्चित रूप से निजी स्थानों पर तो इनकी संख्या काफी अधिक है।
ग्लीडेन को आधिकारिक तौर पर 2017 में भारत में लॉन्च किया गया था। लॉन्चिंग के बाद इसके यूजर्स की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखी गई है। तीन साल के भीतर इस डेटिंग ऐप के 10 लाख यूजर्स हो गए थे और अब बढ़कर 20 लाख हो गए हैं। यह उनके वैश्विक यूजर्स आधार का लगभग 20 प्रतिशत है, जिससे भारत उनके लिए एक महत्वपूर्ण बाजार बन गया है। ग्लीडेन अपनी सफलता का श्रेय उन जरूरतों को देता है, जिनकी वह पूर्ति कर रहा है। यह ऐप उन लोगों के लिए है, जो शादी से दुखी हैं और उसे समाप्त नहीं किया जा सकता है। यह किसी ऐसे व्यक्ति से मिलने का अवसर प्राप्त करता है, जिससे वे अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में झूठ बोले बिना जुड़ सकते हैं।
इंडिया टुडे के विश्लेषण के अनुसार, पारंपरिक डेटिंग वेबसाइटों और ऐप्स पर लगभग 30 प्रतिशत यूजर्स अपनी वैवाहिक स्थिति के बारे में झूठ बोल रहे हैं। यह रिश्ते में गलत व्याख्या और गलत उम्मीदों को जन्म देता है। शिडेल कहते हैं, “ग्लीडेन इन समान विचारधारा वाले लोगों से मिलने के लिए एक सुरक्षित वातावरण दे रहा है। उन्होंने कहा कि 2018 में एडस्ट्री को अपराध की कैटेगरी से बाहर किए जाने के बाद भारत में ग्राहकों की संख्या में भारी उछाल आया है।
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