बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) ने हाल ही में एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा है कि यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (POCSO) अधिनियम का उद्देश्य नाबालिग बच्चों को यौन शोषण से बचाना है न कि युवा वयस्कों के सहमति से बने रोमांटिक संबंधों को अपराध बनाना। कोर्ट ने कहा कि नाबालिगों के सहमति से बनाए गए संबंधों के लिए उन्हें दंडित करने और अपराधी साबित करने के लिए यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) कानून नहीं बनाया गया है।
हाइव लॉ के मुताबिक, हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी एक यौन उत्पीड़न मामले में आरोपी को जमानत देते हुए की। जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई ने एक नाबालिग के अपहरण और बलात्कार के 22 वर्षीय आरोपी को IPC की धारा 363, 376 और पॉक्सो अधिनियम की धारा 4 के तहत जमानत दे दी। मुंबई पुलिस ने एक लड़की के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में आरोपी को गिरफ्तार किया था।
क्या है पूरा मामला?
दिसंबर 2020 को पीड़िता की मां द्वारा अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई गई थी, क्योंकि उसकी बेटी घर नहीं लौटी थी। इसके बाद पीड़िता की तलाश की गई। बाद में उसके बयान से पता चला कि वह 27 दिसंबर 2020 को घर से निकली थी, दो-तीन दिन अपनी सहेली के यहां रही। चूंकि वह अपने माता-पिता को बताए बिना घर से चली गई थी, इसलिए वह घर लौटने से डर रही थी। आरोप है कि एक रात जब वह सो रही थी तो आरोपी ने उसे बिल्डिंग की छत पर आने को कहा और उसके साथ जबरन संबंध बनाए। मामले में आरोपी 23 साल का एक युवक है, जिसे नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
हाई कोर्ट
कोर्ट ने कहा, “यह ध्यान देने की आवश्यकता है कि POCSO एक्ट बच्चों को यौन उत्पीड़न आदि के अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है। इसमें बच्चों के हित और भलाई की रक्षा के लिए कड़े दंडात्मक प्रावधान हैं। निश्चित रूप से इसका उद्देश्य नाबालिगों को रोमांटिक या सहमति से बने रिश्तों के लिए दंडित करना और उन्हें अपराधी के रूप में ब्रांड करना नहीं है।” अदालत ने कहा कि यह सच हो सकता है कि पोक्सो एक्ट के 2(D) के अनुसार किशोर एक बच्चा था। लेकिन घटना के समय आरोपी भी 22 साल का एक युवा लड़का था। पीड़ित लड़की की मां के बयान से संकेत मिलता है कि संबंध सहमति से बने थे।
हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देते हुए कहा कि युवक एक साल से अधिक समय से हिरासत में है। साथ ही लंबित मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए उन्हें निम्नलिखित शर्तों पर जमानत दी। कोर्ट ने 30,000 रुपये के निजी मुचलके पर उसे जमानत पर रिहा किया। कोर्ट ने युवक को मुंबई के दिंडोशी पुलिस स्टेशन में दो महीने में एक बार महीने के पहले सोमवार को सुबह 11.00 बजे से दोपहर 02.00 बजे के बीच रिपोर्ट करने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता और अन्य गवाहों के साथ हस्तक्षेप नहीं करेगा और साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा या शिकायतकर्ता को प्रभावित करने या संपर्क करने का प्रयास नहीं करेगा।
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