महाराष्ट्र की एक अदालत ने हाल ही में ठाणे के एक डॉक्टर को दुष्कर्म के करीब 6 साल पुराने एक मामले में बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में विफल रहा, जिससे आरोपी को संदेह का लाभ दिया जाना चाहिए। सत्र अदालत ने 2017 में महिला मरीज के साथ बलात्कार करने और उसे धोखा देने के आरोपी 50 वर्षीय डॉक्टर को बरी करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने रेप के बारे में एक शब्द भी नहीं कहा।
क्या है पूरा मामला?
अभियोजन पक्ष के अनुसार, डॉक्टर पर 18 अगस्त, 2017 को अपने अस्पताल में महिला मरीज के साथ दुष्कर्म करने और उसे इस घटना के बारे में किसी को न बताने की धमकी देने का आरोप लगाया गया था। 21 साल की महिला सरोगेसी के लिए अस्पताल गई थी। डॉक्टर पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं 376 (बलात्कार), 420 (धोखाधड़ी) और 506 (आपराधिक धमकी) लगाई गई थीं।
बचाव पक्ष के वकील नंदकुमार राजुरकर ने अपनी दलील में कई खामियां बताईं और कहा कि मामले को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष के 10 से अधिक गवाहों से पूछताछ की गई, लेकिन वे ऐसा करने में विफल रहे।
कोर्ट का आदेश
सत्र अदालत की जज रचना आर तेहरा ने 3 जुलाई को अपने आदेश में कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री से, अभियोजन पक्ष यह साबित करने में विफल रहा कि आरोपी ने पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया, उसे धोखा दिया और उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। जज ने आगे कहा कि रासायनिक विश्लेषण रिपोर्ट भी कथित अपराध पर चुप हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद जज रचना तेहरा ने अपने आदेश में कहा, “मुख्य गवाह ने आरोपी द्वारा उसके साथ बलात्कार के संबंध में एक भी शब्द नहीं कहा है। इसके अलावा, उसने धोखाधड़ी या धमकी देने के संबंध में भी एक भी शब्द नहीं कहा है।”
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