पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने हाल ही में एक तलाकशुदा महिला और एक साथ रह रहे एक विवाहित पुरुष द्वारा दायर सुरक्षा की याचिका पर आपत्ति जताई। जस्टिस आलोक जैन ने कहा कि उस व्यक्ति की पत्नी और बच्चे याचिकाकर्ताओं के अवैध और अनैतिक संबंधों का “खामियाजा भुगत रहे” थे और उन्होंने याचिका खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट ने दोनों याचिकाकर्ताओं को उस व्यक्ति की पत्नी को 25,000 रुपये का भुगतान करने का भी निर्देश दिया।
क्या है पूरा मामला?
बार एंड बेंच के मुताबिक, 49 वर्षीय तलाकशुदा महिला ने अपने साथी (एक 33 वर्षीय व्यक्ति, जिसने एक अन्य महिला के साथ विवाह किया था) के साथ याचिका के साथ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उस व्यक्ति की पत्नी उनके घर पर आई थी और एक “तमाशा” खड़ा कर दी। उन्होंने कहा कि पत्नी ने आम जनता की मौजूदगी में झूठे और तुच्छ आरोप लगाकर अपने पति के साथी को बदनाम किया। याचिका में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ताओं को धमकियां जारी की गईं।
हाई कोर्ट
याचिका की जांच करने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि दलीलों से यह संकेत नहीं मिलता है कि कपल के जीवन और स्वतंत्रता को कोई खतरा है। जस्टिस जैन ने अपने आदेश में कहा, “यह याचिका केवल कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग करके याचिकाकर्ताओं के अवैध और अनैतिक संबंधों को कवर करने के लिए दायर की गई है।” अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि याचिका में कोई योग्यता नहीं थी और उस व्यक्ति की पत्नी को 25,000 रुपये का हर्जाना देकर इसे खारिज कर दिया।
अदालत के आदेश के मुताबिक, यह राशि उस व्यक्ति की पत्नी को चार सप्ताह के भीतर चुकानी होगी, जिसे अपनी बेटी के नाम पर एक राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा स्थापित करने के लिए कहा गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस जैन ने हाल ही में एक अन्य लिव-इन कपल को पुलिस सुरक्षा देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि उन्होंने देखा था कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले एक व्यक्ति की शादी किसी अन्य व्यक्ति से हुई थी।
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