CBI लखनऊ की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने दुष्कर्म और एससी-एसटी एक्ट के झूठे मुकदमे दर्ज करने वाले गिरोह के खिलाफ FIR दर्ज की है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई लखनऊ की स्पेशल क्राइम ब्रांच ने इस मामले में 3 मामले दर्ज किए हैं। केंद्रीय एजेंसी ने प्रयागराज में वकीलों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर ब्लैकमेलिंग करने से संबंधित मामले में ये मुकदमा दर्ज किया है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता वकील सुनील कुमार ने कोर्ट को बताया कि प्रयागराज में एक बेहद शातिर गिरोह सक्रिय है, जिसमें कुछ महिलाएं और वकील भी शामिल हैं। यह गिरोह महिलाओं के माध्यम से निर्दोष लोगों पर फर्जी मुकदमे दर्ज करता है और फिर केस वापस लेने के नाम पर उनसे मोटी रकम की मांग को लेकर ब्लैकमेल करता है। इस तथ्य को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने 18 मार्च 2022 को सीबीआई को प्रारंभिक जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद सीबीआई ने मामले की जांच कर FIR दर्ज की है।
वकील की शिकायत पर हुई कार्रवाई
सीबीआई ने प्रयागराज के अलग-अलग थानों में दर्ज कराए गए बलात्कार और अनुसूचित जाति-जनजाति (एससी-एसटी) से संबंधित 51 मुकदमों के बारे में अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल किया था। सीबीआई ने पिछले सप्ताह प्रयागराज के मऊअइमा थाने में साल 2018 में संजू देवी, दारागंज थाने में वर्ष 2021 में निक्की देवी और शिवकुटी थाने में साल 2016 में वकील सुनील कुमार की तरफ से दर्ज कराए गए बलात्कार और एससी-एसटी एक्ट से संबंधित मुकदमे में अपने यहां नया मुकदमा दर्ज करते हुए उसकी विवेचना शुरू की।
संजू देवी के मामले में सीबीआई ने IPC की धारा 313, 376, 380 एवं 506 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। निक्की देवी के मामले में आईपीसी की धारा 376 D, 506 और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इसी तरह सुनील कुमार के मामले में आईपीसी की धारा 147, 323, 379, 504, 506 और एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(2)(V) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
इन मुकदमों की विवेचना के दौरान सीबीआई इनकी प्रामाणिकता की जांच करेगी, क्योंकि इन मुकदमों में अभियुक्तों को फर्जी फंसाए जाने का आरोप है। निक्की देवी के मुकदमे में वकील भूपेन्द्र पांडेय अभियुक्त हैं। इसी तरह सुनील कुमार के मुकदमे में ओम प्रकाश, हरसू प्रसाद, धर्मेन्द्र कुमार एवं रोहित मिश्रा के अलावा कुछ अज्ञात भी अभियुक्त हैं।
गैंग का खुलासा तब हुआ था जब बलात्कार से संबंधित एक मुकदमे के शीघ्र निस्तारण का आदेश देने के लिए एक कथित पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। इस मुकदमे में अभियुक्त बनाए गए वकील ने हाईकोर्ट के सामने एक नया तथ्य लाते हुए ऐसे 51 मुकदमों की सूची हाईकोर्ट को सौंपी। इनमें 36 मुकदमे अकेले मऊअइमा थाने में ही दर्ज हैं।
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