इलाहाबाद हाई कोर्ट (Allahabad High Court) ने अपने एक हालिया फैसले में कहा कि 13 वर्षीय लड़के का बयान कि आवेदक ने ‘गंदी हरकत’ किया है। धारा 204 CrPC के तहत आरोपी (इस मामले में एक महिला आरोपी है) को तलब करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार है। जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने आगे स्पष्ट किया कि इस तरह का कृत्य, यदि परीक्षण में उसी का कमीशन साबित हो जाता है, तो पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत अपराध हो सकता है। यहां तक कि एक बच्चे के निजी अंग को छूना भी POCSO एक्ट की धारा 7 के तहत ‘यौन हमले’ के अंतर्गत आ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
पीठ ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), जौनपुर के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसने पीड़ित की शिकायत पर संज्ञान लेने के बाद आरोपी महिला को समन जारी किया था। पीड़ित लड़के के पिता ने CrPC की धारा 156 (3) के तहत एक आवेदन दायर किया। धारा 204 CrPC के अनुसार प्रक्रिया जारी करने से पहले, अदालत ने धारा 200 CrPC के तहत शिकायतकर्ता (पीड़ित के पिता) के बयान दर्ज किए थे। पीड़ित (एक नाबालिग लड़का) कथित घटना के समय 8 साल का था।
हाई कोर्ट पहुंची आरोपी महिला
लाइव लॉ वेबसाइट के अनुसार, इसी समन आदेश को चुनौती देते हुए आरोपी महिला ने इस आधार पर हाई कोर्ट का रुख किया कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनता है और पीड़िता ने यौन उत्पीड़न के किसी भी कृत्य के बारे में नहीं बताया है। उसने यह भी तर्क दिया गया कि आरोपों की प्रकृति इतनी असंभव है, क्योंकि आवेदक एक महिला होने के नाते ऐसा कार्य नहीं कर सकती थी।
दूसरी ओर, राज्य के वकील ने तर्क दिया कि समन आदेश उचित था, क्योंकि पीड़िता ने कहा था कि आरोपी (एक महिला) ने ‘गन्दी हरकत’ की थी जो कि पॉक्को एक्ट की धारा 7 (यौन हमला) की परिभाषा के तहत आती है।
कोर्ट का आदेश
पीड़ित लड़के के बयान और इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि मजिस्ट्रेट ने शिकायतकर्ता और पीड़ित की दलीलों पर ध्यान दिया था। कोर्ट ने पॉक्सो कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि 13 वर्षीय लड़के के इस बयान पर विचार करते हुए कि आवेदक ने ‘गन्दी हरकत’ की है, आवेदक को पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 के तहत अपराध के लिए समन करने के लिए प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार होगा। यौन इरादे से बच्चे के निजी अंग को छूने पर पॉक्सो एक्ट की धारा 7 के तहत ‘यौन हमला’ किया जा सकता है। ‘यौन इरादे’ की उपस्थिति का सब्जेक्ट ट्रायल का विषय होगा। नतीजतन, आरोपी की याचिका खारिज कर दी गई।
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